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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

3 मुखी · मंगल · अग्नि (ब्रह्मा)

तीन मुखी रुद्राक्ष – रूपांतरण की अग्नि

3 Mukhi Rudraksha

संक्षिप्त उत्तर

मंगल और अग्निदेव द्वारा शासित तीन मुखी रुद्राक्ष पुराने कर्मों को नष्ट करता है और धारक को ऊर्जा, साहस और नई शुरुआत की शक्ति देता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: शिव पुराण · पद्म पुराण

तीन मुखी रुद्राक्ष तीन दिव्य अग्नियों का प्रतीक है और अग्निदेव तथा ब्रह्मा द्वारा शासित है। इसका ज्योतिषीय कारक मंगल है जो ऊर्जा, साहस और कर्म का ग्रह है। यह रुद्राक्ष संचित कर्मों को, विशेषकर अपराधबोध और आत्म-निंदा से जुड़े कर्मों को, जलाने की शक्ति रखता है। कम आत्मसम्मान, अवसाद और प्रेरणाहीनता से ग्रस्त लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है। यह मणिपुर चक्र को सक्रिय कर व्यक्तिगत शक्ति और आत्मविश्वास जगाता है। खिलाड़ियों, सैन्य कर्मियों और उद्यमियों के लिए यह विशेष उपयोगी है।

तीन मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • पुराने कर्म जलाता है और अपराधबोध से मुक्त करता है
  • शारीरिक ऊर्जा, सहनशक्ति और प्रतिस्पर्धी भावना बढ़ाता है
  • कमजोर मंगल को मजबूत करता और उसके अशुभ प्रभाव कम करता है
  • इच्छाशक्ति और निर्णायक कार्य की क्षमता बढ़ाता है

तीन मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें

दिन
मंगलवार
धातु
तांबा या सोना
मंत्र
ॐ क्लीं नमःOm Kleem Namah
मूल्य
₹200 – ₹1,500

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र.क्या तीन मुखी रुद्राक्ष अवसाद में मदद करता है?

हाँ, यह अपराधबोध और आत्म-निंदा से उत्पन्न अवसाद में विशेष रूप से प्रभावी है।

प्र.क्या तीन मुखी रुद्राक्ष छात्रों के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह एकाग्रता, आत्मविश्वास और प्रदर्शन की इच्छाशक्ति बढ़ाता है।

प्र.तीन मुखी रुद्राक्ष किन रोगों में सहायक है?

पारंपरिक रूप से यह पेट, यकृत, पाचन और रक्त संबंधी समस्याओं से जोड़ा जाता है।