2 मुखी · चंद्रमा · अर्धनारीश्वर
दो मुखी रुद्राक्ष – शिव और शक्ति की एकता
2 Mukhi Rudraksha
संक्षिप्त उत्तर
दो मुखी रुद्राक्ष शिव और शक्ति (अर्धनारीश्वर) के मिलन का प्रतीक है। चंद्रमा द्वारा शासित यह रुद्राक्ष संबंधों में सामंजस्य, भावनाओं को शांत करता और मन का पोषण करता है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: शिव पुराण · पद्म पुराण
दो मुखी रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर स्वरूप में शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। चंद्रमा ग्रह द्वारा शासित यह रुद्राक्ष मन, भावनाओं, माता और अंतर्ज्ञान का कारक है। चंद्रमा की अशुभता से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है। यह चिंता, अवसाद, मूड स्विंग और अनिद्रा में राहत देता है। दो मुखों का अर्थ है दोहरेपन का सामंजस्य — दंपतियों के लिए और माता-पिता-संतान संबंधों के लिए यह उत्तम है। यह स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय कर भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ाता है।
दो मुखी रुद्राक्ष के लाभ
- ✦चिंता, अवसाद और भावनात्मक अशांति को शांत करता है
- ✦संबंधों, साझेदारी और वैवाहिक सौहार्द को मजबूत करता है
- ✦कुंडली में कमजोर चंद्रमा के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है
- ✦अंतर्ज्ञान और भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ाता है
दो मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें
- दिन
- सोमवार
- धातु
- चाँदी
- मंत्र
- ॐ नमःOm Namah
- मूल्य
- ₹300 – ₹2,000
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र.क्या दो मुखी रुद्राक्ष विवाह के लिए अच्छा है?
हाँ, यह जीवनसाथियों के बीच सामंजस्य, समझ और भावनात्मक बंधन को बढ़ावा देता है।
प्र.दो मुखी रुद्राक्ष शरीर के किस तरफ पहनें?
इसे गले में या बाईं कलाई पर पहना जा सकता है।
प्र.कितने दो मुखी रुद्राक्ष पहनने चाहिए?
एक दाना चाँदी में धारण करना पर्याप्त है। कुछ साधक 3 या 9 दाने माला में धारण करते हैं।