14 मुखी · शनि · शिव (देव मणि)
चौदह मुखी रुद्राक्ष – देव मणि, दिव्य रत्न
14 Mukhi Rudraksha
संक्षिप्त उत्तर
देव मणि कहलाने वाला चौदह मुखी रुद्राक्ष सभी रुद्राक्षों में सर्वाधिक शुभ है। शनि और शिव द्वारा शासित यह तृतीय नेत्र को सक्रिय करता है और सर्वोच्च सुरक्षा और अंतर्ज्ञान देता है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: शिव पुराण · पद्म पुराण
चौदह मुखी रुद्राक्ष को शास्त्रों में देव मणि कहा गया है और यह एक मुखी के बाद सर्वाधिक शक्तिशाली माना जाता है। यह सीधे शिव के नेत्रों से उत्पन्न माना जाता है। इसकी परिभाषित विशेषता आज्ञा चक्र (तृतीय नेत्र) को सक्रिय करने की अद्भुत शक्ति है। धारक में उच्च अंतर्ज्ञान, दूरदर्शिता और सत्य की प्रत्यक्ष अनुभूति आती है। शनि द्वारा शासित होने से यह साढ़े साती और कर्मिक बाधाओं से असाधारण सुरक्षा प्रदान करता है। शिव पुराण कहता है कि इसे धारण करने वाले को कोई दुर्भाग्य नहीं छू सकता।
चौदह मुखी रुद्राक्ष के लाभ
- ✦तृतीय नेत्र को सक्रिय करता है और अंतर्ज्ञान व दूरदर्शिता में नाटकीय वृद्धि करता है
- ✦सभी अशुभ ग्रहीय और कार्मिक प्रभावों से सर्वोच्च सुरक्षा प्रदान करता है
- ✦भारी कार्मिक ऋणों को चुकाने और कठिन कार्मिक पैटर्न से मुक्ति में मदद करता है
- ✦देवताओं के समान शक्ति, स्वास्थ्य, समृद्धि और दिव्य कृपा प्रदान करता है
चौदह मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें
- दिन
- सोमवार या शनिवार
- धातु
- सोना या चाँदी
- मंत्र
- ॐ नमः शिवायOm Namah Shivaya
- मूल्य
- ₹5,000 – ₹75,000+
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र.चौदह मुखी रुद्राक्ष को देव मणि क्यों कहा जाता है?
देव मणि का अर्थ है "दिव्य रत्न।" शास्त्रों में कहा गया है कि इसे स्वयं देवता धारण करते हैं और यह शिव के नेत्रों से उत्पन्न हुआ है।
प्र.क्या चौदह मुखी रुद्राक्ष ज्योतिषियों के लिए अच्छा है?
हाँ, यह ज्योतिषियों के लिए सर्वोत्तम रुद्राक्षों में से एक है क्योंकि यह तृतीय नेत्र को सक्रिय कर अंतर्ज्ञानी अनुभूति को तीव्र करता है।
प्र.क्या चौदह मुखी रुद्राक्ष अन्य शनि उपायों की जगह ले सकता है?
यह सबसे शक्तिशाली शनि उपायों में से एक है लेकिन शनि पूजा के साथ संयोजन आदर्श है।