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देवी दुर्गा / देवी कुंजिका — पूजा विधि

सिद्ध कुंजिका पूजा विधि

सिद्ध कुंजिका पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में सिद्ध कुंजिका पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतादेवी दुर्गा / देवी कुंजिका
अवधि30–45 मिनट (एकल पाठ); 2–3 घंटे (11 या 108 बार पाठ)
शुभ समयनवरात्रि — चैत्र और शारद दोनों — सिद्ध कुंजिका पूजा का सर्वोच्च अवसर है

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

सिद्ध कुंजिका पूजा — चरण दर चरण विधि

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    सिद्ध कुंजिका पूजा ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल (प्रदोष काल) में स्नान के पश्चात करनी चाहिए

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    लाल या सफेद कपड़े पहनें और पूर्व की ओर मुख करके लाल या सफेद आसन पर बैठें

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    लाल कपड़े से ढकी वेदी पर देवी यंत्र या दुर्गा/चामुंडा की छवि स्थापित करें

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    घी का दीपक जलाएं और देवी को लाल गुड़हल, कुमकुम, लाल चंदन और ताजे फल अर्पित करें

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    नवार्ण मंत्र — "ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विचे" — से 9 बार प्रारंभ करें

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    फिर यंत्र में देवी का आह्वान करने के लिए संक्षिप्त षोडशोपचार पूजा करें

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    अब सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् का सम्पूर्ण पाठ करें जो रुद्रयामल के शिव-पार्वती संवाद से प्रारंभ होती है

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    न्यूनतम तीन बार (त्रिकाल पाठ) या अधिक शक्तिशाली अनुष्ठान हेतु 11 या 108 बार पाठ करें

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    देवी आरती के साथ समाप्त करें, नैवेद्यम (मीठा चावल या पंचामृत) अर्पित करें और परिवार को प्रसाद वितरित करें।

सिद्ध कुंजिका पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

सिद्ध कुंजिका पूजा के लाभ

सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् देवी की कृपा प्राप्त करने का सर्वाधिक कुशल माध्यम माना जाता है, जो कम समय में पूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ का सम्पूर्ण आध्यात्मिक फल प्रदान करता है। नियमित पाठ से साधकों को सिद्धियाँ — असाधारण उपलब्धियाँ — प्राप्त होती हैं, जिनमें दुर्जेय बाधाओं पर विजय, बुद्धि की स्पष्टता, वाक्पटुता, तथा काले जादू, बुरी नजर और नकारात्मक ग्रह प्रभावों का निराकरण सम्मिलित है। भौतिक धरातल पर निरंतर कुंजिका पूजा समृद्धि, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति करती है, जबकि आध्यात्मिक धरातल पर यह सूक्ष्म शरीर को शीघ्र शुद्ध कर मोक्ष-मार्ग पर प्रगति को तीव्र करती है।

FAQ — सिद्ध कुंजिका पूजा विधि

प्र.क्या सिद्ध कुंजिका पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, सिद्ध कुंजिका पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.सिद्ध कुंजिका पूजा में कितना समय लगता है?

सिद्ध कुंजिका पूजा में सामान्यतः 30–45 मिनट (एकल पाठ); 2–3 घंटे (11 या 108 बार पाठ) का समय लगता है।

प्र.क्या सिद्ध कुंजिका पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

सिद्ध कुंजिका पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.सिद्ध कुंजिका पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

नवरात्रि — चैत्र और शारद दोनों — सिद्ध कुंजिका पूजा का सर्वोच्च अवसर है, जिसमें अष्टमी और नवमी सर्वाधिक शक्तिशाली दिन हैं। वर्ष भर शुक्रवार साप्ताहिक साधना के लिए आदर्श हैं। दैनिक ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 90 मिनट पूर्व) और प्रदोष काल (संध्याकाल) पाठ के लिए सर्वाधिक शक्तिशाली समय हैं। प्रत्येक मास की कृष्णाष्टमी और दुर्गाष्टमी जैसी विशेष देवी तिथियाँ भी अत्यंत शुभ हैं।