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देवी शीतला — पूजा विधि

शीतला पूजा विधि

शीतला पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में शीतला पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतादेवी शीतला
अवधि45–60 मिनट
शुभ समयशीतला अष्टमी (बसोड़ा) — होली के आठ दिन बाद

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

शीतला पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    शीतला अष्टमी (बसोड़ा) पर पिछली शाम को ठंडा खाना तैयार करें

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    सुबह जल्दी स्नान करें और ठंडे पानी, दही और बासी चावल का घड़ा लेकर शीतला मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें

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    देवी शीतला की प्रतिमा रखें और नीम के पत्ते, ठंडा पानी, बासी भोजन और झाड़ू अर्पित करें

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    घर के चारों ओर ठंडा पानी छिड़कें

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    घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं

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    शीतला चालीसा का पाठ करें

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    बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें

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    बासी भोजन प्रसाद के रूप में वितरित करें।

शीतला पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

शीतला पूजा के लाभ

परिवार को बुखार, चिकनपॉक्स, खसरा और अन्य संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है, चल रही बीमारी से जल्दी ठीक होने का आशीर्वाद मिलता है, विशेषकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा का वरदान मिलता है, महामारी से सुरक्षा मिलती है, पित्त संबंधी रोगों की गर्मी दूर होती है, और देवी की शीतल कृपा घर पर बरसती है।

FAQ — शीतला पूजा विधि

प्र.क्या शीतला पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, शीतला पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.शीतला पूजा में कितना समय लगता है?

शीतला पूजा में सामान्यतः 45–60 मिनट का समय लगता है।

प्र.क्या शीतला पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

शीतला पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.शीतला पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शीतला अष्टमी (बसोड़ा) — होली के आठ दिन बाद, चैत्र माह के कृष्ण अष्टमी पर — मुख्य उत्सव दिवस है। प्रत्येक सोमवार और बुखार या चेचक के प्रकोप के दौरान भी पूजा की जाती है। सूर्योदय से पहले प्रातःकाल सबसे शुभ है।