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भगवान सूर्य और भगवान विष्णु — पूजा विधि

निष्क्रमण संस्कार विधि

निष्क्रमण संस्कार की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में निष्क्रमण संस्कार करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान सूर्य और भगवान विष्णु
अवधि1–2 घंटे
शुभ समयजन्म के चौथे माह में शुभ तिथि को। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्योदय के समय सर्वोत्तम। अमावस्या

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

निष्क्रमण संस्कार — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    जन्म के चौथे महीने में शुभ दिन चुनें

  2. 2

    सुबह शिशु को स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं

  3. 3

    पिता सूर्योदय के समय बच्चे को बाहर ले जाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख करें

  4. 4

    सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए शिशु को सूर्य की ओर उठाएं

  5. 5

    बच्चे को आकाश, पेड़ और आसपास दिखाएं

  6. 6

    घर के अंदर आकर आरती करें

  7. 7

    परिवार और पड़ोसी उपहारों के साथ बच्चे को आशीर्वाद दें।

निष्क्रमण संस्कार के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

निष्क्रमण संस्कार के लाभ

बच्चे को जीवनशक्ति, स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है, शिशु सौर ऊर्जा और प्राकृतिक दुनिया से जुड़ता है, नजर और नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाव होता है और नवजात को समुदाय और पारिवारिक वंश में औपचारिक स्वागत मिलता है।

FAQ — निष्क्रमण संस्कार विधि

प्र.क्या निष्क्रमण संस्कार घर पर की जा सकती है?

हाँ, निष्क्रमण संस्कार घर पर की जा सकती है।

प्र.निष्क्रमण संस्कार में कितना समय लगता है?

निष्क्रमण संस्कार में सामान्यतः 1–2 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या निष्क्रमण संस्कार के लिए पंडित जरूरी है?

निष्क्रमण संस्कार परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.निष्क्रमण संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?

जन्म के चौथे माह में शुभ तिथि को। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्योदय के समय सर्वोत्तम। अमावस्या, राहु काल और अशुभ नक्षत्रों से बचें।