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भगवान कूर्म (विष्णु के कच्छप अवतार) — पूजा विधि

कूर्म पूजा विधि

कूर्म पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में कूर्म पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान कूर्म (विष्णु के कच्छप अवतार)
अवधि45 मिनट से 1 घंटा
शुभ समयकूर्म जयंती (वैशाख पूर्णिमा)

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

कूर्म पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    भगवान कूर्म की प्रतिमा को एक स्थिर, सपाट सतह पर स्थापित करें

  2. 2

    ब्रह्मांडीय नींव के प्रतीक के रूप में नीचे एक छोटा पत्थर रखें

  3. 3

    गणपति पूजा से प्रारंभ करें

  4. 4

    पंचामृत और स्वच्छ जल से अभिषेक करें

  5. 5

    पीले और सुनहरे फूल, तुलसी और कमल अर्पित करें

  6. 6

    घी का दीपक जलाएं

  7. 7

    चावल, तिल और मिठाई अर्पित करें

  8. 8

    कूर्म पुराण से कूर्म स्तुति और दशावतार स्तोत्र पढ़ें

  9. 9

    "ॐ कूर्माय नमः" का 108 बार जाप करें

  10. 10

    पर्वत धारण करते कच्छप पर ध्यान करें

  11. 11

    गृह सुरक्षा और स्थिरता के लिए प्रार्थना करें

  12. 12

    आरती के साथ समाप्त करें।

कूर्म पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

कूर्म पूजा के लाभ

उथल-पुथल भरे समय में स्थिरता और दृढ़ता; घर और नींव की सुरक्षा; दीर्घकालिक परियोजनाओं को पूर्णता तक पहुंचाने का धैर्य; बेचैनी और अस्थिरता से राहत; निर्माण या रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के लिए आशीर्वाद; लंबी बीमारी में सहारा; रीढ़ और संरचनात्मक स्वास्थ्य का सुदृढ़ीकरण; दीर्घायु और धन का स्थिर संचय।

FAQ — कूर्म पूजा विधि

प्र.क्या कूर्म पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, कूर्म पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.कूर्म पूजा में कितना समय लगता है?

कूर्म पूजा में सामान्यतः 45 मिनट से 1 घंटा का समय लगता है।

प्र.क्या कूर्म पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

कूर्म पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.कूर्म पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

कूर्म जयंती (वैशाख पूर्णिमा), अक्षय तृतीया और गुरुवार। गृह प्रवेश समारोह के दौरान और प्रमुख निर्माण परियोजनाओं से पहले शुभ। कार्तिक मास भी अनुकूल माना जाता है।