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देवी दुर्गा (नौ कन्याओं के रूप में) — पूजा विधि

कन्या पूजा विधि

कन्या पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में कन्या पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतादेवी दुर्गा (नौ कन्याओं के रूप में)
अवधि45 मिनट – 1.5 घंटे
शुभ समयनवरात्रि की अष्टमी और नवमी। कन्या पूजा के लिए सूर्योदय के बाद प्रातःकाल का समय सबसे शुभ है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

कन्या पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    अष्टमी या नवमी की सुबह नौ कन्याओं को घर पर आमंत्रित करें

  2. 2

    रोली मिले जल से उनके पाँव धोएं और माथे पर तिलक लगाएं

  3. 3

    ताजे बने पूरी, हलवे और चने का भोजन परोसें

  4. 4

    प्रत्येक कन्या को उपहार दें

  5. 5

    आरती करें और उनका आशीर्वाद लें।

कन्या पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

कन्या पूजा के लाभ

दुर्गा के सभी नौ रूपों का अपार आशीर्वाद मिलता है, परिवार में समृद्धि और सुरक्षा आती है, हार्दिक इच्छाएं पूरी होती हैं, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर के बच्चों का स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।

FAQ — कन्या पूजा विधि

प्र.क्या कन्या पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, कन्या पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.कन्या पूजा में कितना समय लगता है?

कन्या पूजा में सामान्यतः 45 मिनट – 1.5 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या कन्या पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

कन्या पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.कन्या पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी। कन्या पूजा के लिए सूर्योदय के बाद प्रातःकाल का समय सबसे शुभ है।