होलिका (प्रतीकात्मक), भगवान विष्णु एवं प्रह्लाद, पूजा विधि
होली पूजा (होलिका दहन) विधि
होली पूजा (होलिका दहन) की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में होली पूजा (होलिका दहन) करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 12 अगस्त 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
होली पूजा (होलिका दहन), चरण दर चरण विधि
- 1
होलिका चिता बनाने के लिए लकड़ी और उपले इकट्ठे करें।
- 2
केंद्र में होलिका का पुतला रखें।
- 3
शुभ समय पर (आमतौर पर पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद) चिता जलाएं।
- 4
अग्नि के चारों ओर प्रदक्षिणा करें (3 या 7 बार)।
- 5
कच्चा नारियल, अनाज, तिल और गुलाल अग्नि में अर्पित करें।
- 6
भगवान विष्णु और प्रह्लाद को प्रार्थना करें।
- 7
सुरक्षा के लिए अंगारे या राख घर लें।
होली पूजा (होलिका दहन) के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
होली पूजा (होलिका दहन) के लाभ
बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, परिवार को सुरक्षा मिलती है, नवीनीकरण और नई शुरुआत होती है, आने वाले मौसम में अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है, और सामूहिक पूजा से सामुदायिक बंधन मजबूत होते हैं।
FAQ, होली पूजा (होलिका दहन) विधि
प्र.क्या होली पूजा (होलिका दहन) घर पर की जा सकती है?
हाँ, होली पूजा (होलिका दहन) घर पर की जा सकती है।
प्र.होली पूजा (होलिका दहन) में कितना समय लगता है?
होली पूजा (होलिका दहन) में सामान्यतः 1–1.5 घंटे का समय लगता है।
प्र.क्या होली पूजा (होलिका दहन) के लिए पंडित जरूरी है?
होली पूजा (होलिका दहन) परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.होली पूजा (होलिका दहन) का सबसे अच्छा समय क्या है?
फाल्गुन पूर्णिमा की शाम (रंगवाली होली से एक रात पहले) स्थानीय पंचांग द्वारा घोषित शुभ मुहूर्त पर।