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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIगुरुवार, 30 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष · विवाह संगतता

मांगलिक दोष

मांगलिक दोष तब बनता है जब कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित हो। यह दोष विशेष रूप से विवाह और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में इसके निवारण के अनेक उपाय और निरस्तीकरण की शर्तें दी गई हैं।

मंगल के प्रभाव, दोष के प्रकार, 12 लग्नों में विश्लेषण, कुंभ विवाह, मंगल शांति पूजा और सिद्ध उपायों की संपूर्ण जानकारी।

मुख्य मार्गदर्शिकाएँ

क्या मांगलिक, अमांगलिक से विवाह कर सकता है?

हाँ, शर्तों के साथ। कुंभ विवाह और मंगल शांति जैसे उपाय इसे संभव बनाते हैं।

मांगलिक दोष का विवाह जीवन पर प्रभाव

मंगल की स्थिति (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भाव) के अनुसार प्रभाव अलग होता है।

मांगलिक दोष निवारण के 12 नियम

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में वर्णित स्थितियाँ जिनमें मांगलिक दोष स्वतः समाप्त होता है।

लग्न के अनुसार मांगलिक दोष