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वैदिक ज्योतिष · दोष विश्लेषण

काल सर्प दोष

काल सर्प योग तब बनता है जब जन्म कुंडली में सातों ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित हों। इसके 12 प्रकार हैं, जो पुराणों के सर्पों के नाम पर हैं और राहु की भाव-स्थिति से निर्धारित होते हैं। प्रत्येक प्रकार का प्रभाव और उपाय अलग होता है।

काल सर्प योग के सभी 12 प्रकार — प्रभाव, उपाय और 12 लग्नों के लिए विश्लेषण। प्रत्येक प्रकार के पृष्ठ पर 144 लग्न-संयोजनों का पूर्ण विवरण है।

त्र्यंबकेश्वर पूजा सभी 12 प्रकारों के लिए सबसे प्रभावी एकल उपाय मानी जाती है।

01

अनंत काल सर्प दोष

राहु: 1वाँ भावकेतु: 7वाँ भावसर्प: Ananta (Shesha Nag)

राहु प्रथम भाव में — व्यक्तित्व और विवाह प्रभावित

02

कुलिक काल सर्प दोष

राहु: 2वाँ भावकेतु: 8वाँ भावसर्प: Kulika

राहु द्वितीय भाव में — धन और परिवार प्रभावित

03

वासुकि काल सर्प दोष

राहु: 3वाँ भावकेतु: 9वाँ भावसर्प: Vasuki (king of serpents)

राहु तृतीय भाव में — भाई-बहन और साहस प्रभावित

04

शंखपाल काल सर्प दोष

राहु: 4वाँ भावकेतु: 10वाँ भावसर्प: Shankhapala

राहु चतुर्थ भाव में — मातृ सुख और संपत्ति प्रभावित

05

पद्म काल सर्प दोष

राहु: 5वाँ भावकेतु: 11वाँ भावसर्प: Padma

राहु पंचम भाव में — संतान और विद्या प्रभावित

06

महापद्म काल सर्प दोष

राहु: 6वाँ भावकेतु: 12वाँ भावसर्प: Mahapadma

राहु षष्ठ भाव में — शत्रु और स्वास्थ्य प्रभावित

07

तक्षक काल सर्प दोष

राहु: 7वाँ भावकेतु: 1वाँ भावसर्प: Takshaka

राहु सप्तम भाव में — विवाह और व्यापार प्रभावित

08

कर्कोटक काल सर्प दोष

राहु: 8वाँ भावकेतु: 2वाँ भावसर्प: Karkotaka

राहु अष्टम भाव में — आयु और विरासत प्रभावित

09

Shankhchur Kaal Sarp Dosha

राहु: 9वाँ भावकेतु: 3वाँ भावसर्प: Shankhachuda

Rahu in 9th house, Ketu in 3rd. Affects fortune and effort.

10

घातक काल सर्प दोष

राहु: 10वाँ भावकेतु: 4वाँ भावसर्प: Ghataka

राहु दशम भाव में — कर्म और यश प्रभावित

11

विषधर काल सर्प दोष

राहु: 11वाँ भावकेतु: 5वाँ भावसर्प: Vishadhara

राहु एकादश भाव में — लाभ और मित्र प्रभावित

12

शेषनाग काल सर्प दोष

राहु: 12वाँ भावकेतु: 6वाँ भावसर्प: Shesha (the world serpent)

राहु द्वादश भाव में — मोक्ष और विदेश प्रभावित