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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIरविवार, 19 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष · ग्रह गोचर

राहु गोचर 2025-2026 — सभी 12 राशियों पर प्रभाव

राहु — उत्तर ग्रंथि, छाया ग्रह, कर्म-कारक। इनका कोई भौतिक शरीर नहीं, फिर भी ज्योतिष में इनका प्रभाव किसी भी भौतिक ग्रह से कम नहीं। राहु सदा वक्री (retrograde) चलते हैं — एक राशि में डेढ़ वर्ष और संपूर्ण राशिचक्र में अठारह वर्ष। ये जिस राशि में बैठते हैं, उस राशि की इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं को असाधारण रूप से बढ़ा देते हैं। 2025-2026 में राहु मीन राशि में हैं; 2026-2027 में कुम्भ राशि में जाएंगे। अपनी राशि चुनें और जानें — राहु आपके जीवन में क्या परिवर्तन लेकर आए हैं।

एक राशि में वास

डेढ़ वर्ष

राशिचक्र भ्रमण

~18 वर्ष

गति

सदा वक्री

वर्तमान गोचर

मीन 2025-26

राहु का ज्योतिषीय स्वरूप

राहु — कर्म और महत्वाकांक्षा

राहु उत्तर चंद्र ग्रंथि (North Lunar Node) हैं — एक छाया बिंदु जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की परस्पर स्थिति से निर्मित होता है। इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं, परंतु ज्योतिष में ये भौतिक इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं, विदेश, और अपरंपरागत मार्गों के कारक हैं। राहु जिस राशि और भाव में होते हैं, उसकी ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देते हैं — यह वृद्धि शुभ भी हो सकती है और अशुभ भी।

राहु-केतु धुरी — कर्म का तराज़ू

राहु और केतु सदा एक-दूसरे के सामने रहते हैं — जब राहु एक राशि में, केतु उसके विपरीत राशि में। यह धुरी पिछले जन्म के कर्म (केतु) और इस जन्म की सीख (राहु) का प्रतीक है। राहु जहाँ भविष्य की ओर खींचते हैं, केतु वहाँ अतीत का बोझ रखते हैं। इस धुरी को समझना जीवन-उद्देश्य की कुंजी है।

वर्तमान और आगामी गोचर

अभी (2025-2026)

राहु मीन में • केतु कन्या में

आध्यात्मिक जिज्ञासा, कलात्मक सृजन, और भ्रम का काल

आगामी (2026-2027)

राहु कुम्भ में • केतु सिंह में

तकनीकी क्रांति, सामाजिक बदलाव, और नवाचार का युग

राशि चुनें

मेष

राहु मेष गोचर →

राहु जब मेष राशि में गोचर करते हैं, तो यह संयोग अत्यंत विस्फोटक ऊर्जा का निर्माण करता है।

वृषभ

राहु वृषभ गोचर →

वृषभ राशि शुक्र की है — भौतिक सुख, सौंदर्य, धन-संचय, और स्थायित्व की राशि। जब राहु वृषभ मे

मिथुन

राहु मिथुन गोचर →

मिथुन राशि बुध की है — संचार, बुद्धि, व्यापार, लेखन, और तकनीक की राशि। राहु जब मिथुन में ग

कर्क

राहु कर्क गोचर →

कर्क राशि चंद्रमा की है — माँ, घर, परिवार, भावनाएं, और जल तत्व। जब राहु कर्क में गोचर करते

सिंह

राहु सिंह गोचर →

सिंह सूर्य की राशि है — आत्म-सम्मान, नेतृत्व, रचनात्मकता, और प्रसिद्धि का केंद्र। राहु जब

कन्या

राहु कन्या गोचर →

कन्या राशि बुध की दूसरी राशि है — विश्लेषण, स्वास्थ्य, सेवा, और विस्तार-ध्यान की राशि। राह

तुला

राहु तुला गोचर →

तुला राशि शुक्र की राशि है — संतुलन, न्याय, साझेदारी, विवाह, और सौंदर्य का प्रतीक। राहु जब

वृश्चिक

राहु वृश्चिक गोचर →

वृश्चिक मंगल की राशि है — रहस्य, गहन परिवर्तन, मृत्यु-पुनर्जन्म, और गुप्त ज्ञान का केंद्र।

धनु

राहु धनु गोचर →

धनु राशि बृहस्पति की राशि है — ज्ञान, दर्शन, धर्म, उच्च शिक्षा, और विस्तार का केंद्र। राहु

मकर

राहु मकर गोचर →

मकर राशि शनि की राशि है — महत्वाकांक्षा, अनुशासन, करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा, और पृथ्वी-तत्व

कुम्भ

सक्रिय गोचर

राहु कुम्भ गोचर →

कुम्भ राशि शनि की दूसरी राशि है — सामाजिक चेतना, नवाचार, तकनीक, मानवतावाद, और भविष्य की रा

मीन

सक्रिय गोचर

राहु मीन गोचर →

मीन राशि बृहस्पति की राशि है — आध्यात्मिकता, मोक्ष, सपने, कल्पना, और जल तत्व की अंतिम राशि

सामान्य प्रश्न

राहु एक राशि में कितने समय रहते हैं?

राहु एक राशि में लगभग डेढ़ वर्ष (18 महीने) रहते हैं। संपूर्ण राशिचक्र भ्रमण में राहु को लगभग 18 वर्ष लगते हैं। राहु सदा वक्री (retrograde) गति से चलते हैं — अर्थात् राशिचक्र में उल्टी दिशा में।

राहु और केतु एक साथ क्यों चलते हैं?

राहु और केतु चंद्रमा की कक्षा के दो छोर (nodes) हैं — उत्तर छोर राहु और दक्षिण छोर केतु। ये दोनों सदा एक-दूसरे से ठीक सात राशि (180 डिग्री) दूर होते हैं। जब राहु एक राशि में होते हैं, केतु उसके विपरीत राशि में होते हैं।

राहु का गोचर किन राशियों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है?

राहु का गोचर सबसे अधिक उस राशि पर प्रभाव डालता है जहाँ राहु बैठे हों। राहु की दृष्टि पाँचवें, सातवें, और नौवें भाव पर होती है। जन्मकुंडली में जिस भाव में राहु विराजमान हों, उस भाव के कारकतत्व इस काल में विशेष रूप से सक्रिय होंगे।

राहु गोचर के सामान्य उपाय क्या हैं?

राहु के सामान्य उपायों में शामिल हैं — "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का 108 बार जाप, शनिवार को नारियल जल में प्रवाहित करना, दुर्गाजी की पूजा, और गरीबों को दान। गोमेद रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। प्रत्येक राशि के लिए उपाय भिन्न होते हैं — अपनी राशि का पृष्ठ देखें।

अपनी कुंडली देखें →शनि गोचर →Rahu Transit (English) →