आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIरविवार, 19 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

वैदिक ज्योतिष · ग्रह गोचर

गुरु गोचर 2025-2026 — सभी 12 राशियों पर प्रभाव

बृहस्पति — देवगुरु, ज्ञान के देवता, धर्म और सत्य के प्रतिनिधि — एक राशि में लगभग एक वर्ष रहते हैं। नौ ग्रहों में गुरु सबसे शुभ और कल्याणकारी हैं। जहाँ शनि का गोचर कठिनाइयाँ और परीक्षाएं लाता है, वहाँ गुरु का गोचर अवसर, ज्ञान, और भाग्य का द्वार खोलता है। 2025-2026 में गुरु वृषभ राशि में विराजमान हैं — धन, सौंदर्य, और स्थायित्व का आशीर्वाद लेकर। अपनी राशि चुनें और जानें — देवगुरु बृहस्पति आपके जीवन में किन क्षेत्रों को समृद्ध करने आए हैं।

एक राशि में वास

~1 वर्ष

राशिचक्र भ्रमण

~12 वर्ष

उच्च राशि

कर्क

नीच राशि

मकर

वर्तमान गोचर 2025-2026

गुरु अभी वृषभ राशि में हैं — विस्तृत विश्लेषण पढ़ें →

गुरु का ज्योतिषीय स्वरूप

गजकेसरी योग — समृद्धि और यश

गजकेसरी योग वैदिक ज्योतिष के सबसे शुभ और प्रसिद्ध योगों में से एक है। जब गुरु और चंद्रमा परस्पर केंद्र भाव में हों तो यह योग बनता है। इस योग में जातक हाथी की तरह बलशाली और सिंह की तरह निर्भीक होता है — इसीलिए "गज" (हाथी) और "केसरी" (सिंह) का नाम दिया गया है। गुरु के गोचर के दौरान जब-जब यह योग सक्रिय होता है, जातक के जीवन में असाधारण शुभता आती है।

गुरु का 12-वर्षीय चक्र

गुरु का 12-वर्षीय चक्र जीवन के प्रमुख अध्यायों को परिभाषित करता है। हर 12 वर्ष में गुरु एक बार फिर उसी राशि में आते हैं जहाँ वे आपके जन्म के समय थे — इसे "गुरु-प्रत्यावर्तन" कहते हैं। यह समय जीवन में नई शुरुआत, नए दृष्टिकोण, और आध्यात्मिक विकास का संकेत देता है। प्रत्येक 12 वर्षों में एक बार आने वाला यह गोचर जीवन के किसी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र को विशेष रूप से आशीर्वादित करता है।

राशि चुनें

मेष

गुरु मेष गोचर →

गुरु जब मेष राशि में गोचर करते हैं तो यह संयोग ज्ञान और साहस का अनूठा मिलन है। मेष का स्वा

वृषभ

अभी

गुरु वृषभ गोचर →

गुरु का वृषभ राशि में गोचर 2025-2026 का सर्वाधिक चर्चित और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। व

मिथुन

गुरु मिथुन गोचर →

मिथुन बुध की राशि है — संचार, बौद्धिक चर्चा, व्यापार, और गतिशीलता का केंद्र। गुरु और बुध क

कर्क

उच्च

गुरु कर्क गोचर →

कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं — यह गुरु का सर्वोत्तम और सबसे शक्तिशाली गोचर है। कर्क

सिंह

गुरु सिंह गोचर →

सिंह सूर्य की राशि है — राजसत्ता, नेतृत्व, आत्म-सम्मान, और रचनात्मकता का प्रतीक। सूर्य और

कन्या

गुरु कन्या गोचर →

कन्या बुध की राशि है — विश्लेषण, सेवा, स्वास्थ्य, और परिपूर्णता का केंद्र। गुरु का कन्या र

तुला

गुरु तुला गोचर →

तुला शुक्र की राशि है — न्याय, संतुलन, साझेदारी, और सौंदर्य का प्रतीक। गुरु और शुक्र के बी

वृश्चिक

गुरु वृश्चिक गोचर →

वृश्चिक मंगल की राशि है — गहराई, रहस्य, परिवर्तन, और पुनर्जन्म का प्रतीक। जब गुरु वृश्चिक

धनु

गुरु धनु गोचर →

धनु बृहस्पति की अपनी राशि है — यह गुरु का घर है। जब गुरु अपनी स्वयं की राशि धनु में गोचर क

मकर

नीच

गुरु मकर गोचर →

मकर शनि की राशि है और गुरु यहाँ नीच के होते हैं — यह गुरु का सबसे चुनौतीपूर्ण गोचर है। मकर

कुम्भ

गुरु कुम्भ गोचर →

कुम्भ शनि की राशि है — समाज, विज्ञान, मानवता, और क्रांतिकारी विचारों का प्रतीक। जब गुरु कु

मीन

गुरु मीन गोचर →

मीन बृहस्पति की दूसरी स्वराशि है — आध्यात्म, मोक्ष, कल्पना, और सूक्ष्म जगत का प्रतीक। जब ग

सामान्य प्रश्न

गुरु एक राशि में कितने समय रहते हैं?

बृहस्पति (गुरु) एक राशि में लगभग एक वर्ष रहते हैं। संपूर्ण राशिचक्र का भ्रमण करने में गुरु को लगभग 12 वर्ष लगते हैं। यही कारण है कि गुरु का प्रत्येक गोचर जीवन में बार-बार आता है और प्रत्येक बार नई संभावनाएं और शुभ अवसर लेकर आता है।

गजकेसरी योग क्या है और यह कैसे बनता है?

गजकेसरी योग वैदिक ज्योतिष के सबसे शुभ योगों में से एक है। यह तब बनता है जब गुरु और चंद्रमा परस्पर केंद्र भाव (1, 4, 7, 10वें) में हों। इस योग में जातक को धन, यश, प्रतिष्ठा, और बुद्धि का विशेष वरदान मिलता है। जन्मकुंडली में या गोचर में जब भी यह योग सक्रिय होता है, जातक के जीवन में शुभ घटनाएं होती हैं।

गुरु 2025-2026 में किस राशि में हैं?

गुरु 2025-2026 में वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं। यह गोचर धन, संपत्ति, कला, और वैवाहिक जीवन के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वृषभ शुक्र की राशि है और गुरु-शुक्र का यह संयोजन भौतिक समृद्धि और सांस्कृतिक उन्नति का प्रतीक है।

गुरु के उपाय क्या हैं?

गुरु के सामान्य उपायों में शामिल हैं — प्रत्येक गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना, बृहस्पति मंदिर में पीले फूल और चने की दाल अर्पित करना, केले का दान करना, "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का 108 बार जाप, और पुखराज रत्न स्वर्ण में धारण करना। प्रत्येक राशि के लिए उपाय कुछ भिन्न हो सकते हैं — अपनी राशि का पृष्ठ देखें।

अपनी कुंडली देखें →शनि गोचर →Jupiter Transit (English) →