स्वप्न शास्त्र · वैदिक स्वप्न व्याख्या
सपने में मोर देखना — अर्थ और स्वप्न शास्त्र विश्लेषण
सपने में मोर (मयूर) देखना अत्यंत शुभ है — यह भगवान कार्तिकेय का वाहन है और सुंदरता, दिव्य कृपा, वर्षा और अहंकार के नाश का प्रतीक है। नाचता मोर अत्यंत शुभ संकेत है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: बृहत् संहिता (वराहमिहिर), स्वप्न चिंतामणि
वैदिक अर्थ
मोर (मयूर) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और भगवान कार्तिकेय का वाहन है। सपने में मोर देखना दिव्य कृपा, सुंदरता और अंधकार पर प्रकाश की विजय को जागृत करता है।
नाचता या पंख फैलाता मोर वैदिक स्वप्न शास्त्र में सबसे शुभ सपने के संकेतों में से एक है — यह आनंद, उत्सव, प्रचुरता और शत्रुओं पर विजय का वादा करता है।
स्वप्न शास्त्र क्या है?
स्वप्न शास्त्र वैदिक स्वप्न व्याख्या का विज्ञान है, जिसकी जड़ें बृहत् संहिता (6ठी शताब्दी CE, वराहमिहिर) और स्वप्न चिंतामणि जैसे ग्रंथों में हैं। आधुनिक मनोविज्ञान के विपरीत जो सपनों को पूरी तरह व्यक्तिपरक मानता है, स्वप्न शास्त्र सपनों को शुभ (शुभ स्वप्न), अशुभ (अशुभ स्वप्न) और तटस्थ श्रेणियों में वर्गीकृत करता है — प्रत्येक में विशिष्ट संदेश और अनुशंसित उपाय होते हैं। परंपरा नौ सर्वोच्च शुभ स्वप्न प्रतीकों (नव शुभ स्वप्न) और बारह अशुभ प्रतीकों को मान्यता देती है।
सामान्य प्रश्न
प्र.सपने में मोर का पंख देखने का क्या मतलब है?
सपने में मोर का पंख — विशेष रूप से नीला-हरा जैसा कृष्ण पहनते हैं — शुभ है और दिव्य सुरक्षा और कलात्मक आशीर्वाद का संकेत देता है।