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ग्रह युति · मंगल + राहु · वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष में मंगल-राहु युति

संक्षिप्त उत्तर

मंगल-राहु युति, जिसे अंगारक योग कहते हैं, राहु की जुनूनी ऊर्जा से मंगल की आक्रामकता को बढ़ाती है — तीव्र महत्वाकांक्षा, जोखिम लेने की प्रवृत्ति और असाधारण उपलब्धि की संभावना।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: बृहत्पाराशरहोराशास्त्र · फलदीपिका

मंगल-राहु युति वैदिक ज्योतिष में सबसे अधिक चर्चित संयोगों में से एक है जिसे "अंगारक योग" कहा जाता है। राहु उत्तर चंद्र नोड है जो आत्मा की अतृप्त सांसारिक इच्छाओं का प्रतीक है। जब राहु मंगल के साथ युति करता है, तो मंगल की पहले से तीव्र ऊर्जा और अधिक आवेगी, जुनूनी और परंपरा-भंजक हो जाती है।

इस युति वाले जातक असाधारण साहसी होते हैं और वे ऐसे जोखिम उठाते हैं जिनसे अन्य लोग बचते हैं। खेल, राजनीति, सैन्य, उद्यमिता या प्रौद्योगिकी में इनकी उपलब्धियां उल्लेखनीय हो सकती हैं। लेकिन इस युति का नकारात्मक पक्ष भी महत्वपूर्ण है — लापरवाही, विस्फोटक क्रोध और सामाजिक मानदंडों की अवहेलना की प्रवृत्ति हो सकती है।

स्वास्थ्य के संदर्भ में बुखार, संक्रमण और रक्त विकारों की आशंका रहती है। मंगल और राहु की दशा-अंतर्दशा अवधि जातक के जीवन में सबसे अधिक घटनापूर्ण और अस्थिर होती है।

मंगल-राहु युति के प्रभाव

  1. 1.विस्फोटक साहस और जोखिम लेने की प्रवृत्ति; जातक जुनूनी तीव्रता से लक्ष्य का पीछा करता है, अक्सर असंभव लगने वाला काम कर दिखाता है।
  2. 2.अचानक क्रोध, लापरवाह निर्णय और नियम तोड़ने की प्रवृत्ति; पारंपरिक सीमाएं इस जातक को दमघोंटू लगती हैं।
  3. 3.बुखार, संक्रमण, अप्रत्याशित दुर्घटनाओं और रक्तचाप की समस्याओं की बढ़ी हुई आशंका।
  4. 4.खेल, रक्षा, राजनीति या विघटनकारी प्रौद्योगिकी जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में असाधारण करियर सफलता की संभावना।

उपाय

  • शनिवार को राहु बीज मंत्र 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' का 108 बार जाप करें और मंगलवार को मंगल मंत्र का — दोनों विरोधी ऊर्जाओं को संतुलित करने के लिए।
  • मंगलवार को मंगल के लिए लाल मसूर और गुड़ दान करें; शनिवार को राहु के लिए नीला कपड़ा और सरसों का तेल दान करें।
  • प्रतिदिन अनुशासित शारीरिक व्यायाम, मार्शल आर्ट या योग करें — इस युति की कच्ची विस्फोटक ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने से इसकी विनाशकारी क्षमता काफी कम हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र.अंगारक योग क्या है और यह कैसे बनता है?

अंगारक योग तब बनता है जब मंगल और राहु जन्म कुंडली में एक ही राशि में स्थित होते हैं। शास्त्रों में इसे संभावित अशांत संयोग बताया गया है जो राहु की जुनूनी ऊर्जा से मंगल की अग्नि-प्रकृति को और बढ़ा देता है।

प्र.क्या मंगल-राहु युति लाभकारी हो सकती है?

हां। जब यह अच्छी स्थिति में हो और शुभ दृष्टि से युक्त हो, तो यह निडर अग्रणी, असाधारण एथलीट और सफलता के नए मानक स्थापित करने वाले नेता पैदा करती है। तृतीय, षष्ठ और दशम भाव सामान्यतः अधिक अनुकूल हैं।

प्र.जीवन के किस काल में मंगल-राहु युति का सर्वाधिक प्रभाव रहता है?

मंगल महादशा (7 वर्ष) और राहु महादशा (18 वर्ष) तथा इनकी अंतर्दशाएं सबसे अधिक प्रभावशाली होती हैं — कुंडली की समग्र शक्ति के अनुसार नाटकीय सकारात्मक या नकारात्मक घटनाएं हो सकती हैं।