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वैदिक जन्म कुंडली विश्लेषण

विराट कोहली

Virat Kohli

विराट कोहली की कुंडली — जन्म कुंडली विश्लेषण

तुला लग्न लग्न · वृश्चिक राशि चंद्र · अनुराधा नक्षत्र नक्षत्र

जन्म तिथि

5 November 1988

जन्म समय

5:30 AM

जन्म स्थान

Delhi

लग्न

तुला लग्न

Libra (Tula)

चंद्र राशि

वृश्चिक राशि

Scorpio (Vrischika)

नक्षत्र

अनुराधा नक्षत्र

Anuradha (Pada 1)

सूर्य राशि

Scorpio (Vrischika)

कुंडली परिचय

विराट कोहली की कुण्डली में तुला लग्न है। लग्नेश शुक्र तृतीय भाव में धनु राशि में शनि और मंगल के साथ स्थित है — यह त्रिग्रही संयोग खेल, साहस और शारीरिक परिश्रम के भाव में है। यही उनके विश्वस्तरीय क्रिकेटर बनने का मूल ज्योतिषीय आधार है। द्वितीय भाव में वृश्चिक राशि में सूर्य-चंद्र का एकसाथ होना उन्हें दबाव में और अधिक आक्रामक बनाता है — वृश्चिक टूटता नहीं, तीव्र होता है। अनुराधा नक्षत्र के शनि-अधिपत्य ने उन्हें असाधारण शारीरिक अनुशासन और फिटनेस के प्रति लगभग धार्मिक समर्पण दिया है। सप्तम भाव में राहु ने उनकी सार्वजनिक साझेदारियों और विवाह को असाधारण रूप से हाई-प्रोफाइल बनाया है।

प्रमुख योग एवं ग्रह-संयोग

  • 01द्वितीय भाव में सूर्य-चंद्र युति (वृश्चिक राशि) — दबाव में तीव्रता बढ़ाने का योग; अमावस्या-जन्म की भीतरी अग्नि
  • 02तृतीय भाव में त्रिग्रही संयोग (शुक्र-शनि-मंगल) — खेल, साहस और शारीरिक परिश्रम के भाव में तीन ग्रह: विश्वस्तरीय खिलाड़ी का ज्योतिषीय हस्ताक्षर
  • 03अनुराधा-शनि संयोग — शनि अनुराधा का नक्षत्रेश; तृतीय भाव में स्थित होकर अभूतपूर्व एथलेटिक अनुशासन
  • 04सप्तम भाव में राहु — विस्फोटक साझेदारियाँ, उच्च-प्रोफ़ाइल विवाह और असाधारण IPL/ब्रांड आय
  • 05लग्न में केतु — समय-समय पर पहचान का संकट; 2019–2021 का शतक सूखा इसी का प्रतिफल

सामान्य प्रश्न

विराट कोहली का लग्न कौन सा है?

विराट कोहली का लग्न तुला (Libra) है। 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली में प्रातः 5:30 बजे तुला राशि पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी। लग्नेश शुक्र का तृतीय भाव में शनि-मंगल के साथ होना उनकी पूरी व्यक्तित्व और करियर की कुंजी है।

कोहली का शतक सूखा (2019–2021) ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों आया?

इस दौर में केतु से सम्बंधित अन्तर्दशाओं का प्रभाव था। लग्न में केतु की स्थिति आत्म-विश्वास को अस्थायी रूप से धुंधला करती है। एक ऐसे बल्लेबाज़ के लिए जिसकी पहचान शतकों से जुड़ी है, लग्न का केतु सबसे कठिन ग्रह-काल होता है। 2021-22 में शुक्र और सूर्य की दशाओं के सक्रिय होने पर द्वितीय भाव की सूर्य-चंद्र ऊर्जा पुनः जागृत हुई।

यह विश्लेषण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जन्म-डेटा और शास्त्रीय वैदिक सिद्धांतों पर आधारित है।

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