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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

वैदिक जन्म कुंडली विश्लेषण

प्रियंका चोपड़ा

Priyanka Chopra

प्रियंका चोपड़ा की कुंडली, जन्म कुंडली विश्लेषण

मिथुन लग्न लग्न · मकर राशि चंद्र · श्रवण नक्षत्र नक्षत्र

जन्म तिथि

18 July 1982

जन्म समय

4:30 AM

जन्म स्थान

Jamshedpur, Jharkhand

लग्न

मिथुन लग्न

Gemini (Mithuna)

चंद्र राशि

मकर राशि

Capricorn (Makara)

नक्षत्र

श्रवण नक्षत्र

Shravana (Pada 3)

सूर्य राशि

Cancer (Karka)

कुंडली परिचय

प्रियंका चोपड़ा की कुण्डली में मिथुन लग्न है, बुध की राशि, जो एक साथ दो दुनियाओं में जीने की क्षमता देती है। यही कारण है कि वे बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों में एकसाथ सफल रहीं। दसवें भाव में मीन राशि में गुरु का स्थित होना हंस महापुरुष योग बनाता है, यह योग उन्हें विदेशों में भी असाधारण ख्याति देता है, जो 2015 में Quantico के साथ साकार हुई। द्वितीय भाव में सूर्य-बुध का बुधादित्य योग उनकी भाषा-कुशलता और ब्रांड वैल्यू का आधार है। अष्टम भाव में मकर राशि में श्रवण नक्षत्र का चंद्रमा उनकी गहरी अवलोकन-क्षमता और परिवर्तनकारी प्रवृत्ति का संकेत है।

प्रमुख योग एवं ग्रह-संयोग

  • 01हंस महापुरुष योग, दसवें भाव में मीन राशि में गुरु: पंचमहापुरुष योगों में से एक; विदेशों में ख्याति और कर्मक्षेत्र में असाधारण प्रतिष्ठा
  • 02बुधादित्य योग (द्वितीय भाव), कर्क राशि में सूर्य-बुध युति: मुख, वाणी और ब्रांड के माध्यम से धन-संचय
  • 03उच्च शनि (पंचम भाव), तुला राशि में शनि उच्च का; रचनात्मकता में अनुशासन और विलम्बित परन्तु स्थायी प्रेम-सफलता
  • 04सप्तम भाव में राहु, विदेशी साझेदारी की ओर आकर्षण; निक जोनस से विवाह इसी राहु का प्रतिफल
  • 05लग्न में केतु, अकारण चुम्बकत्व और आत्मिक गहराई; सामाजिक कार्यों और UNICEF सेवा का कारक

सामान्य प्रश्न

प्रियंका चोपड़ा का लग्न कौन सा है?

प्रियंका चोपड़ा का लग्न मिथुन (Gemini) है। 18 जुलाई 1982 को जमशेदपुर में प्रातः 4:30 बजे मिथुन राशि पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी। बुध-अधिपत्य का मिथुन लग्न उन्हें एक साथ कई क्षेत्रों में सफल होने की क्षमता देता है, अभिनय, निर्माण, लेखन और मानवाधिकार कार्य।

2000 में मिस वर्ल्ड बनने का ज्योतिषीय कारण क्या था?

2000 में मिस वर्ल्ड का ताज बृहस्पति महादशा में मिला। गुरु सप्तम और दशम भाव का स्वामी होकर दसवें भाव में मीन राशि में हंस महापुरुष योग बना रहा है। इस महादशा में गुरु की अपनी दशा ने दसवें भाव की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को साकार किया।

यह विश्लेषण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जन्म-डेटा और शास्त्रीय वैदिक सिद्धांतों पर आधारित है।

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