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नक्षत्र गाइड

रोहिणी नक्षत्र — चन्द्रमा का प्रिय नक्षत्र, सृजन और समृद्धि का वरदान

रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि के 10°00' से 23°20' तक विस्तृत है और यह 27 नक्षत्रों में चौथा स्थान रखता है। यह चन्द्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है — वृषभ राशि के 3° पर चन्द्रमा उच्च (exalted) होते हैं, जो कि रोहिणी नक्षत्र में ही है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था — यह तथ्य इस नक्षत्र की दिव्यता, लावण्य और सृजनात्मक शक्ति का प्रमाण है।

April 19, 20268 min readnakshatraAniket Nigam

Quick Answer

रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि में 10° से 23°20' तक स्थित है, जिसके देवता ब्रह्मा (प्रजापति) और ग्रह स्वामी चन्द्रमा हैं। यह चन्द्रमा का सर्वाधिक प्रिय और उच्च-स्थान का नक्षत्र है जो सृजन, सौन्दर्य, उर्वरता और भौतिक समृद्धि का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण इसी नक्षत्र में जन्मे थे — इस नक्षत्र के जातक कलाप्रिय, पोषणकारी और प्रेममय होते हैं।

नक्षत्र परिचय: देवता, स्वामी, शक्ति और मूल तत्त्व

रोहिणी नक्षत्र के अधिपति देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं — सृष्टि के रचयिता, समस्त जीवन के जनक। प्रजापति का प्रभाव इस नक्षत्र में सृजन, वृद्धि और प्रचुरता के रूप में प्रकट होता है। ग्रह स्वामी चन्द्रमा हैं जो मन, भावना, मातृत्व और सौन्दर्य के कारक हैं। यह नक्षत्र चन्द्रमा की "अपनी गृह राशि" जैसा है — चन्द्र यहाँ सर्वाधिक प्रसन्न और बलवान होते हैं।

रोहिणी की मूल शक्ति "रोहण शक्ति" है — वृद्धि, उर्वरता और पोषण की शक्ति। "रोहिणी" शब्द का अर्थ ही है "लाल वर्ण वाली" या "उगने वाली" — जैसे पौधा अंकुरित होकर बढ़ता है, वैसे ही यह नक्षत्र जीवन के हर क्षेत्र में उर्वरता और वृद्धि का वरदान देता है। इस नक्षत्र का गण मनुष्य है, नाड़ी कफ है और योनि सर्प है। प्रतीक चिन्ह बैलगाड़ी (बैलों का रथ) है जो समृद्धि और कृषि का प्रतीक है।

रोहिणी नक्षत्र का अभिजित मुहूर्त से गहरा सम्बन्ध है — यह एक उप-नक्षत्र है जो रोहिणी के समीप क्षेत्र में माना जाता है और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पद विभाजन में रोहिणी के चारों पद मकर, कुम्भ, मीन और मेष नवांश में पड़ते हैं। वृषभ राशि के साथ चन्द्रमा के स्वामित्व का संयोग इस नक्षत्र को भौतिक सुख, भूमि, सम्पत्ति और कला का विशेष कारक बनाता है।

स्वभाव और व्यक्तित्व: सृजनशीलता, संवेदनशीलता और सांसारिक सुख

रोहिणी नक्षत्र के जातक सृजनशील, संवेदनशील, सौन्दर्यप्रिय और भोगप्रिय होते हैं। इन्हें जीवन के सुखों — उत्तम भोजन, सुन्दर वस्त्र, कला, संगीत और विलास — में विशेष रुचि होती है। ये जातक अपने परिवेश को सुन्दर बनाने में कोई कमी नहीं रखते। चन्द्रमा के प्रभाव से इनकी भावनाएँ गहरी होती हैं और ये दूसरों की भावनाओं को तत्काल समझ लेते हैं।

रोहिणी जातकों में स्वामित्व और ईर्ष्या की प्रवृत्ति भी पाई जाती है — जैसे चन्द्रमा अपनी सभी 27 पत्नियों (नक्षत्रों) में से रोहिणी को विशेष प्रेम करते थे, किन्तु रोहिणी को भी इसकी स्वाभाविक आसक्ति थी। ये जातक अपने प्रिय लोगों और वस्तुओं के प्रति अत्यंत मोहग्रस्त हो सकते हैं। भौतिकवाद की प्रवृत्ति इनमें प्रबल होती है — इन्हें जब तक इन्द्रिय-तृप्ति नहीं मिलती, ये संतुष्ट नहीं होते।

किन्तु इस भोगप्रियता के साथ रोहिणी जातकों में पोषण और देखभाल का अद्भुत गुण होता है। ये अपने परिवार, मित्रों और समाज को पालने-पोसने में आनन्द पाते हैं। इनकी वाणी मधुर होती है, आँखें आकर्षक होती हैं और व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक चुम्बकत्व होता है। श्रीकृष्ण की भाँति ये जातक अपनी उपस्थिति मात्र से वातावरण को प्रेममय बना देते हैं।

करियर और व्यवसाय: कला, कृषि, सौन्दर्य और वित्त

रोहिणी नक्षत्र कला, संगीत, नृत्य, चित्रकला, फिल्म और मनोरंजन उद्योग के लिए अत्यंत अनुकूल है। ब्रह्मा की सृजन-शक्ति और चन्द्रमा का सौन्दर्यबोध मिलकर इन जातकों को कलाकार, संगीतकार, अभिनेता, फोटोग्राफर और डिजाइनर बनाते हैं। इनमें सौन्दर्य को पहचानने और उसे रूपांतरित करने की अद्वितीय क्षमता होती है।

कृषि, खाद्य उद्योग, भूमि-व्यवसाय और हरित उद्योग इस नक्षत्र के लिए विशेष उपयुक्त हैं। रोहण शक्ति — उगाने और बढ़ाने की शक्ति — इन जातकों को किसान, बागवान, खाद्य-प्रसंस्करण विशेषज्ञ और रेस्तराँ उद्यमी बनाती है। सौन्दर्य-प्रसाधन, फैशन, आभूषण और विलासिता वस्तुओं के व्यापार में भी ये विशेष सफल होते हैं।

वित्त, बैंकिंग और सम्पत्ति प्रबंधन में भी रोहिणी जातक उत्कृष्ट होते हैं। वृषभ राशि का सम्बन्ध धन और सम्पत्ति से है, और इस नक्षत्र के जातकों में धन को बढ़ाने और सुरक्षित रखने की प्राकृतिक क्षमता होती है। ये जातक जो भी क्षेत्र चुनते हैं, उसमें भौतिक समृद्धि अवश्य प्राप्त करते हैं।

  • कला, संगीत, नृत्य और मनोरंजन
  • फिल्म, फोटोग्राफी और डिजाइन
  • कृषि एवं खाद्य उद्योग
  • सौन्दर्य-प्रसाधन एवं फैशन
  • बैंकिंग एवं वित्त प्रबंधन
  • भूमि एवं सम्पत्ति व्यवसाय
  • आभूषण एवं विलासिता वस्तु उद्योग

प्रेम और विवाह: गहरा प्रेम, निष्ठा और स्वामित्व

रोहिणी नक्षत्र के जातक प्रेम में अत्यंत गहरे, रोमांटिक और भावनापूर्ण होते हैं। ये अपने प्रेम को व्यक्त करने में कंजूसी नहीं करते — फूल, उपहार, विशेष आयोजन और मधुर वाणी से वे अपने प्रिय को सदैव विशेष अनुभव कराते हैं। इनकी संवेदनशीलता इन्हें असाधारण प्रेमी बनाती है।

किन्तु रोहिणी जातकों में ईर्ष्या और स्वामित्व की प्रवृत्ति प्रबल होती है — ये अपने साथी को खोने का भय सदैव महसूस करते हैं। यदि साथी अधिक स्वतंत्र हो या अन्य लोगों में अधिक रुचि ले, तो रोहिणी जातक व्याकुल हो जाते हैं। इनके लिए विश्वास और सुरक्षा की भावना वैवाहिक सुख का आधार है। मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी और अनुराधा नक्षत्र के साथ इनकी अच्छी अनुकूलता होती है।

विवाह में रोहिणी जातक अत्यंत समर्पित और घर को सुन्दर बनाने में रुचि रखने वाले होते हैं। ये उत्तम गृहस्थ होते हैं — स्वादिष्ट भोजन बनाना, घर सजाना और परिवार के लिए विशेष आयोजन करना इन्हें आनन्द देता है। कुट मेलापक में योनि (सर्प) और ग्रह मैत्री का विशेष ध्यान रखें।

स्वास्थ्य और शारीरिक प्रवृत्तियाँ: कण्ठ, मुख और कफ-प्रकृति

ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र का सम्बन्ध गले, कण्ठ, मुख और ग्रीवा (गर्दन) से है — क्योंकि यह वृषभ राशि में स्थित है जो शरीर में गले का प्रतिनिधित्व करती है। इस नक्षत्र के जातकों को गला सम्बन्धी समस्याएँ — जैसे थायरॉइड, टॉन्सिल, गले का संक्रमण और स्वर-बैठना — होने की प्रवृत्ति रहती है। मुख और दाँत सम्बन्धी समस्याएँ भी इन जातकों में देखी जाती हैं।

नाड़ी कफ होने से रोहिणी जातकों में कफ-प्रधान शारीरिक प्रकृति होती है। इन्हें सर्दी, खाँसी, श्वास सम्बन्धी समस्याएँ और शरीर में जल-संचय (water retention) की प्रवृत्ति रहती है। भोजन के प्रति अत्यधिक प्रेम और विलासप्रियता के कारण ये जातक अधिक भोजन करते हैं, जिससे मोटापा और उससे जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं।

स्वास्थ्य रक्षा के लिए रोहिणी जातकों को कफ-नाशक आहार लेना चाहिए — गर्म, हल्का और सुपाच्य भोजन। तुलसी, अदरक और काली मिर्च का नित्य सेवन गले और श्वास-तंत्र को स्वस्थ रखता है। नियमित व्यायाम और भोजन में संयम इन जातकों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य-नियम हैं।

उपाय और आध्यात्मिक साधना: ब्रह्मा पूजा, चन्द्र मंत्र और श्वेत उपाय

रोहिणी नक्षत्र के जातकों के लिए ब्रह्मा (प्रजापति) की उपासना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। पुष्कर तीर्थ (जो ब्रह्माजी का एकमात्र मन्दिर है) की यात्रा और पूजा विशेष फलदायी है। "ॐ ब्रह्मणे नमः" मंत्र का प्रतिदिन जाप करें। कमल के पुष्प और श्वेत वस्त्र ब्रह्मा जी को अर्पित करें। भगवान विष्णु की पूजा भी ब्रह्मा-प्रजापति की कृपा प्राप्त करने में सहायक है।

चन्द्रमा इस नक्षत्र के ग्रह स्वामी हैं, इसलिए चन्द्र को बलवान रखना अत्यंत आवश्यक है। चन्द्र मंत्र "ॐ सों सोमाय नमः" का प्रतिदिन 108 बार जाप करें — विशेषतः सोमवार को। मोती (Pearl) चन्द्रमा का रत्न है जिसे दाहिने हाथ की कनिष्ठिका में धारण किया जाता है — किन्तु कुण्डली की जाँच के बाद। सोमवार का व्रत, शिव-पार्वती की पूजा और शिवलिंग पर दूध अर्पित करना चन्द्र को प्रसन्न करता है।

रोहिणी जातकों के लिए श्वेत वस्तुओं का दान विशेष लाभदायक है — श्वेत पुष्प, दूध, चावल, चन्दन और श्वेत वस्त्र सोमवार को दान करें। गायों की सेवा करना और उन्हें हरा चारा देना इस नक्षत्र का विशेष धर्म-कर्म है। जल-स्रोतों की रक्षा करना, पौधारोपण करना और किसानों की सहायता करना रोहिणी की रोहण शक्ति को जागृत करता है।

Frequently Asked Questions

रोहिणी नक्षत्र में चन्द्रमा उच्च के क्यों होते हैं?

रोहिणी नक्षत्र चन्द्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है — इसीलिए वृषभ राशि के 3° पर (जो रोहिणी नक्षत्र में आता है) चन्द्रमा अपनी उच्च स्थिति में होते हैं। ब्रह्मा की सृजन-शक्ति और वृषभ की स्थिर-पृथ्वी ऊर्जा मिलकर चन्द्रमा के मन, भावना और पोषण के गुणों को पूर्णतः अभिव्यक्त होने का अवसर देती हैं। यहाँ चन्द्रमा सर्वाधिक बलशाली और फलदायी होते हैं।

रोहिणी नक्षत्र के जातकों का स्वभाव कैसा होता है?

रोहिणी नक्षत्र के जातक सृजनशील, संवेदनशील, सौन्दर्यप्रिय और भावनापूर्ण होते हैं। इनमें पोषण करने और दूसरों की देखभाल करने का स्वाभाविक गुण होता है। ये भोगप्रिय और विलासप्रिय भी होते हैं। इनकी वाणी मधुर और व्यक्तित्व आकर्षक होता है। साथ ही, ईर्ष्या और स्वामित्व की प्रवृत्ति भी इनमें प्रबल होती है।

श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में क्यों महत्वपूर्ण है?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था जो इस नक्षत्र की दिव्यता का सबसे बड़ा प्रमाण है। श्रीकृष्ण की बाँसुरी की मधुर धुन, उनका सौन्दर्य, उनकी कला और उनका प्रेम — ये सब रोहिणी नक्षत्र के गुण हैं। उनकी माता यशोदा का पोषण और गोपियों का प्रेम — रोहिणी की रोहण शक्ति का ही प्रतीक है। इसीलिए जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है।

रोहिणी नक्षत्र के जातकों के लिए कौन सा रत्न उचित है?

रोहिणी नक्षत्र के ग्रह स्वामी चन्द्रमा का रत्न मोती (Pearl) है। इसे सोमवार को दाहिने हाथ की कनिष्ठिका उँगली में धारण करें। मोती को कच्चे दूध में धोकर और "ॐ सों सोमाय नमः" मंत्र से अभिमंत्रित करके धारण करना चाहिए। किन्तु रत्न धारण से पूर्व योग्य ज्योतिषी से कुण्डली का पूर्ण विश्लेषण अवश्य कराएँ।

रोहिणी नक्षत्र के प्रमुख उपाय क्या हैं?

रोहिणी नक्षत्र के प्रमुख उपाय हैं: ब्रह्मा जी की उपासना, चन्द्र मंत्र "ॐ सों सोमाय नमः" का जाप, सोमवार का व्रत, मोती रत्न धारण (कुण्डली जाँच के बाद), श्वेत पुष्प और दूध का दान, गायों की सेवा, पौधारोपण तथा शिव-पार्वती की पूजा। भोजन में संयम और नियमित व्यायाम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक उपाय हैं।